दरभंगा, बिहार में शराब जब्ती: अवैध शराब तस्करी की बढ़ती समस्या और कानून व्यवस्था पर सवाल
भारत में मानसून का आगमन हमेशा से ही एक महत्वपूर्ण घटना रही है। यह न केवल कृषि और जल संसाधनों के लिए आवश्यक है, बल्कि देश के समग्र आर्थिक और सामाजिक जीवन पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ता है। इस लेख में, हम उन राज्यों की चर्चा करेंगे जहां मानसून पहले ही पहुंच चुका है, उन राज्यों की संभावना जिनमें आने वाले दिनों में मानसून पहुंच सकता है, और उन राज्यों की जो बाढ़ के जोखिम का सामना कर सकते हैं।
दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत में जून के पहले सप्ताह में केरल के तट से प्रवेश करता है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस वर्ष मानसून समय पर पहुंचा है और अपनी सामान्य गति से आगे बढ़ रहा है। केरल के बाद, मानसून कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, और तेलंगाना जैसे दक्षिणी राज्यों में आगे बढ़ता है।
1. केरल: मानसून 1 जून के आसपास केरल में प्रवेश कर चुका है, जो कि अपने सामान्य तिथि के अनुसार है। केरल में वर्षा की तीव्रता अधिक रही है और राज्य में कृषि गतिविधियाँ तेज हो चुकी हैं।
2. कर्नाटक: केरल के बाद कर्नाटक में मानसून 5-10 जून के बीच पहुंचता है। इस साल भी यही स्थिति रही और राज्य के विभिन्न हिस्सों में अच्छी बारिश हुई है।
3. तमिलनाडु: तमिलनाडु में भी मानसून 7-12 जून के बीच प्रवेश करता है। इस साल बारिश ने समय पर दस्तक दी और इससे राज्य के जलाशयों में जल स्तर बढ़ गया है।
दक्षिणी राज्यों के बाद, मानसून पश्चिमी और मध्य भारत की ओर बढ़ता है। इसमें महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, और छत्तीसगढ़ शामिल हैं।
1. महाराष्ट्र और गोवा: महाराष्ट्र और गोवा में मानसून 10-15 जून के बीच पहुंचता है। मुंबई और पुणे जैसे शहरों में भारी बारिश हुई है, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। गोवा में भी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि देखी गई है क्योंकि बारिश का मौसम यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य को और भी निखारता है।
2. गुजरात: गुजरात में मानसून 15-20 जून के बीच प्रवेश करता है। राज्य में मानसून के आगमन के साथ ही कृषि गतिविधियों में तेजी आई है।
3. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़: इन राज्यों में मानसून 15-20 जून के बीच पहुंचता है। मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई है जिससे नदी-नाले उफान पर हैं।
3. उत्तरी भारत
उत्तर भारत में मानसून का आगमन जून के अंत या जुलाई की शुरुआत में होता है। इस क्षेत्र में मानसून की शुरुआत दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, और उत्तराखंड से होती है।
1. दिल्ली और उत्तर प्रदेश: दिल्ली और उत्तर प्रदेश में मानसून 25 जून से 5 जुलाई के बीच पहुंचता है। इस साल भी मानसून समय पर पहुंचने की संभावना है। दिल्ली में मानसून के आगमन के साथ ही तापमान में गिरावट देखी गई है।
2. हरियाणा और पंजाब: हरियाणा और पंजाब में मानसून 1-10 जुलाई के बीच पहुंचता है। इन राज्यों में धान की खेती के लिए मानसून का समय पर आना अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
3. हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड: राज्यों में मानसून 1-10 जुलाई के बीच पहुंचता है। इन राज्यों में भारी बारिश और भूस्खलन का खतरा बना रहता है।
पूर्वोत्तर भारत में मानसून सबसे पहले पहुंचता है, मई के अंत से जून के पहले सप्ताह के बीच। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, और त्रिपुरा इस क्षेत्र के प्रमुख राज्य हैं।
1. असम और मेघालय: असम और मेघालय में मानसून मई के अंत में प्रवेश करता है। इस साल भी मानसून ने समय पर दस्तक दी है और राज्य में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है।
2. अरुणाचल प्रदेश: अरुणाचल प्रदेश में भी मानसून मई के अंत या जून की शुरुआत में पहुंचता है। यहां की घाटियों और पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश और भूस्खलन का खतरा बना रहता है।
3. मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, और त्रिपुरा: राज्यों में मानसून जून के पहले सप्ताह में पहुंचता है। बारिश के कारण यहां की नदियों का जलस्तर बढ़ गया है।
मानसून के दौरान बाढ़ का खतरा हमेशा बना रहता है, विशेषकर वे राज्य जो नदियों के किनारे स्थित हैं या जहां जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है।
1. असम: असम में बाढ़ का खतरा हर साल बना रहता है। ब्रह्मपुत्र नदी के उफान पर आने से राज्य के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस साल भी मानसून के आगमन के साथ ही कई जिलों में बाढ़ की स्थिति है।
2. बिहार: बिहार में गंगा, कोसी, और अन्य नदियों के कारण बाढ़ का खतरा रहता है। मानसून के दौरान नदियों के जलस्तर में वृद्धि होती है, जिससे बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
3. उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में भी गंगा और यमुना नदियों के कारण बाढ़ का खतरा रहता है। विशेषकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो सकती है।
4. ओडिशा और पश्चिम बंगाल: ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी बाढ़ का खतरा रहता है। मानसून के दौरान इन राज्यों में भारी बारिश होती है जिससे नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है।
5. केरल: केरल में भी बाढ़ का खतरा रहता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां भारी बारिश होती है और जल निकासी की व्यवस्था उचित नहीं है।
मानसून भारत के अधिकांश हिस्सों में समय पर पहुंच चुका है और आने वाले दिनों में और भी राज्यों में दस्तक देने वाला है। हालांकि, इसके साथ ही बाढ़ का खतरा भी बढ़ जाता है, जिसके लिए राज्यों को पूर्व तैयारी करनी चाहिए। सरकारों को चाहिए कि वे बाढ़ प्रबंधन के लिए आवश्यक कदम उठाएं ताकि जनधन की हानि को कम किया जा सके। मानसून का समय न केवल कृषि और जल संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह प्राकृतिक आपदाओं का समय भी होता है, जिसके लिए हमें सतर्क और तैयार रहना चाहिए।
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