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हाल ही में सिंगापुर में आयोजित FATF प्लेनरी में भारत को 'रेगुलर फॉलो-अप' कैटेगरी में रखा गया है, जो एक बड़ा सम्मान है। यह सम्मान भारत को अन्य चार G20 देशों के साथ मिलाकर एक विशेष समूह में रखता है।
भारत की बड़ी सफलता:
FATF (Financial Action Task Force) ने 2023-24 के म्यूचुअल इवैल्यूएशन में भारत के उत्कृष्ट प्रदर्शन को मान्यता दी है। यह मूल्यांकन मनी लॉन्ड्रिंग (ML) और आतंकवाद वित्तपोषण (TF) के खिलाफ भारत की प्रभावी कार्रवाई को दर्शाता है।
1. आर्थिक स्थिरता: FATF ने भारत द्वारा नकदी-आधारित अर्थव्यवस्था से डिजिटल अर्थव्यवस्था में परिवर्तन की सराहना की है। जन धन, आधार और मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी के माध्यम से वित्तीय समावेशन में वृद्धि हुई है, जिससे लेनदेन अधिक ट्रैसेबल हुए हैं और ML/TF जोखिम कम हुए हैं।
2. वैश्विक निवेश: FATF की मान्यता से भारत को वैश्विक वित्तीय बाजारों और संस्थानों में बेहतर पहुंच मिलेगी और निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।
3. FATF स्टीयरिंग ग्रुप में योगदान: भारत पहले से ही FATF स्टीयरिंग ग्रुप का सदस्य है। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन से भारत को समूह के समग्र कार्य में महत्वपूर्ण योगदान करने का अवसर मिलेगा।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने इस मान्यता को भारत की वित्तीय प्रणाली को ML/TF खतरों से सुरक्षित रखने के लिए पिछले 10 वर्षों में लागू की गई कठोर और प्रभावी उपायों का प्रमाण बताया है। यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और वित्तीय अपराधों के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में उसकी सक्रिय भूमिका को भी दर्शाता है।
FATF एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 1989 में मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद वित्तपोषण और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की अखंडता के खिलाफ अन्य खतरों से निपटने के लिए की गई थी। भारत 2010 में FATF का सदस्य बना।
पिछले G20 बैठक में भारत ने जलवायु परिवर्तन, वैश्विक व्यापार, और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण चर्चाएँ की थीं। उस बैठक में भी भारत की नेतृत्व की भूमिका को मान्यता मिली थी।
G20 बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, और जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा से भी महत्वपूर्ण बातचीत की। इन बैठकों में व्यापार, तकनीकी सहयोग, और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया गया, जबकि ब्रिटेन के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत हुई। जापान के साथ आधारभूत संरचना और रक्षा सहयोग पर चर्चा की गई, जिससे दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत हुए।
G20 की बैठकों में भारत की भागीदारी ने इसे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर दिया। भारत ने वैश्विक मुद्दों पर अपने विचार प्रस्तुत किए और समाधान के लिए सक्रिय योगदान दिया। भारत की इस सक्रिय भागीदारी ने इसे एक जिम्मेदार और विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित किया है।
FATF द्वारा प्राप्त इस सम्मान से भारत की वैश्विक वित्तीय प्रणाली में स्थिति और भी मजबूत हुई है। यह न केवल भारत की आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देगा बल्कि वैश्विक वित्तीय संस्थानों में निवेशकों का विश्वास भी बढ़ाएगा। भारत की इस उपलब्धि से अन्य देशों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत होता है कि कैसे वे भी अपने AML/CFT फ्रेमवर्क को मजबूत कर सकते हैं।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी वित्तीय प्रणाली को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें डिजिटलीकरण, बैंकिंग सुधार और वित्तीय समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास शामिल हैं। JAM ट्रिनिटी के माध्यम से वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ी है और अधिक लोग बैंकिंग प्रणाली से जुड़े हैं। इससे न केवल वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ी है बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण के जोखिम भी कम हुए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति मजबूत की है। G20 बैठकों में उनकी भागीदारी ने भारत को वैश्विक मुद्दों पर एक मजबूत और निर्णायक आवाज के रूप में स्थापित किया है। उनकी नेतृत्व क्षमता और दूरदर्शिता ने भारत को एक महत्वपूर्ण वैश्विक खिलाड़ी के रूप में उभरने में मदद की है।
G20 की बैठक में भारत का प्रमुख योगदान:
पिछले G20 बैठकों में, भारत ने विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर अपने विचार प्रस्तुत किए और महत्वपूर्ण योगदान दिया। जलवायु परिवर्तन पर, भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के लिए अपने प्रयासों को उजागर किया। वैश्विक व्यापार में, भारत ने निष्पक्ष व्यापार नीतियों और विकासशील देशों के हितों की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। डिजिटल अर्थव्यवस्था में, भारत ने अपने डिजिटल इंडिया अभियान और वित्तीय समावेशन के प्रयासों को प्रस्तुत किया, जिससे अन्य देशों ने भी प्रेरणा ली।
G20 बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ महत्वपूर्ण बातचीत की, जिसमें दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के साथ, मोदी ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने और शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के साथ, उन्होंने आधारभूत संरचना परियोजनाओं में सहयोग और रक्षा संबंधों को और मजबूत करने पर बातचीत की।
FATF द्वारा प्राप्त मान्यता ने भारत की वैश्विक स्थिति को और मजबूत किया है। यह न केवल वित्तीय स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में भारत की विश्वसनीयता को भी बढ़ाएगा। यह मान्यता भारत की वित्तीय प्रणाली को और पारदर्शी और सुरक्षित बनाने में मदद करेगी, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण के जोखिम कम होंगे।
FATF की मान्यता से भारत की वैश्विक वित्तीय प्रणाली में अग्रणी भूमिका की पुष्टि होती है। यह मान्यता भारत को अन्य देशों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करती है कि कैसे मजबूत AML/CFT फ्रेमवर्क को लागू किया जा सकता है। भारत की यह उपलब्धि अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उसकी नेतृत्व क्षमता को और मजबूत करती है।
प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्व क्षमता और दूरदर्शिता ने भारत को वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी नीति और निर्णयों ने भारत को एक जिम्मेदार और विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित किया है। उनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व ने न केवल भारत की स्थिति को मजबूत किया है बल्कि वैश्विक मुद्दों पर समाधान की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
FATF द्वारा प्राप्त इस मान्यता से भारत की वैश्विक वित्तीय प्रणाली में स्थिति और भी मजबूत हुई है। यह न केवल भारत की आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देगा बल्कि वैश्विक वित्तीय संस्थानों में निवेशकों का विश्वास भी बढ़ाएगा। भारत की इस उपलब्धि से अन्य देशों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत होता है कि कैसे वे भी अपने AML/CFT फ्रेमवर्क को मजबूत कर सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्व क्षमता और दूरदर्शिता ने भारत को एक महत्वपूर्ण वैश्विक खिलाड़ी के रूप में उभरने में मदद की है, और यह प्रवृत्ति आगे भी जारी रहेगी।
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