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पाकिस्तान की राजनीति हमेशा से ही अस्थिरता और विवादों का केंद्र रही है। हाल ही में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के दामाद, कैप्टन (रिटायर्ड) मोहम्मद सफदर, ने एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया है कि पाकिस्तान की सेना के अधिकारी नवाज शरीफ को लंदन से पाकिस्तान वापस लाने के लिए उनके पैरों पर गिरकर माफी मांगने गए थे। यह खुलासा पाकिस्तान की राजनीति में एक बड़ा भूचाल ले आया है और इसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं।
नवाज शरीफ का निर्वासन और वापसी
नवाज शरीफ, जो कि पाकिस्तान के तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं, को 2017 में भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण पद छोड़ना पड़ा था। 2018 में, उन्हें अल-अजीजिया स्टील मिल्स भ्रष्टाचार मामले में दोषी ठहराया गया और सात साल की सजा सुनाई गई थी। चिकित्सा आधार पर, उन्हें लंदन जाने की अनुमति दी गई थी, जहां उन्होंने लगभग चार साल निर्वासन में बिताए।
2022 में, पाकिस्तानी सेना के अधिकारी लंदन गए थे ताकि नवाज शरीफ को पाकिस्तान वापस लाया जा सके। सफदर ने खुलासा किया कि सेना ने नवाज शरीफ को वापस लाने के लिए बहुत प्रयास किए, जिसमें उनके पैरों पर गिरकर माफी मांगना भी शामिल था। यह दावा पाकिस्तान की राजनीति में बड़े विवाद का कारण बन गया है और इसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हो रही है।
सेना का इमरान खान से असंतोष
पाकिस्तान की सेना और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बीच के संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। सफदर का कहना है कि सेना इमरान खान की नीतियों से बेहद असंतुष्ट थी और उन्हें देश के लिए हानिकारक मानती थी। इस असंतोष ने सेना को नवाज शरीफ को वापस लाने के लिए प्रेरित किया। सेना का मानना था कि नवाज शरीफ की वापसी से देश में राजनीतिक स्थिरता आ सकती है और इमरान खान के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
नवाज शरीफ की बरी
नवाज शरीफ के पाकिस्तान लौटने के बाद, उनके खिलाफ चल रहे कई मामलों में उन्हें बरी कर दिया गया। अल-अजीजिया स्टील मिल्स भ्रष्टाचार मामले में उनकी सजा को समाप्त कर दिया गया और उन्हें अन्य मामलों में भी राहत दी गई। नवाज शरीफ और उनके समर्थकों ने इस निर्णय का स्वागत किया, जबकि उनके विरोधियों ने इसे राजनीतिक दबाव का परिणाम बताया।
नवाज शरीफ के दामाद मोहम्मद सफदर का बयान
कैप्टन (रिटायर्ड) मोहम्मद सफदर, जो कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग (पीएमएल-एन) के प्रमुख कार्यकर्ताओं में से एक हैं, ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यह खुलासा किया। उन्होंने कहा कि नवाज शरीफ जब चौथी बार प्रधानमंत्री बनने के लिए लौटे तो देश के ताकतवर हलकों यानी सेना ने इसका विरोध किया। सफदर ने बताया कि नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री न बनने देने के लिए एनए-15 मानसेहरा सीट पर उन्हें हार दिलाई गई थी।
जनता और सेना आमने-सामने
मौजूदा समय में पाकिस्तान की सेना आवाम का विरोध झेल रही है। अलगाववादियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान की सेना ‘अज़्म-ए-इस्तेहकाम’ नाम का अभियान चलाना चाह रही है। लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद जनता के विरोध की वजह से सेना का यह अभियान सफल नहीं हो पा रहा है। सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ ने कहा था कि देश की कुछ बड़ी राजनीतिक ताकतें इस अभियान को चलने नहीं दे रही हैं और इसके लिए उन्होंने इमरान खान की तरफ इशारा किया था।
नवाज शरीफ का राजनीतिक सफर
नवाज शरीफ का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने पाकिस्तान की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और तीन बार प्रधानमंत्री पद पर आसीन हो चुके हैं। उनका पहला कार्यकाल 1990 से 1993 तक, दूसरा 1997 से 1999 तक और तीसरा 2013 से 2017 तक रहा। उनके तीसरे कार्यकाल में, पनामा पेपर्स लीक के बाद, उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगे और उन्हें पद से हटना पड़ा।
नवाज शरीफ का राजनीतिक प्रभाव
नवाज शरीफ और उनका परिवार पाकिस्तान की राजनीति में एक प्रभावशाली परिवार माना जाता है। उनकी बेटी, मरियम नवाज, भी राजनीति में सक्रिय हैं और पीएमएल-एन की प्रमुख नेता हैं। नवाज शरीफ का राजनीतिक प्रभाव अभी भी पाकिस्तान की राजनीति में बरकरार है और उनकी वापसी ने इस प्रभाव को और मजबूत किया है।
सेना और राजनीति के बीच का संबंध
पाकिस्तान की राजनीति में सेना का बहुत बड़ा प्रभाव है। सेना ने देश की राजनीति में कई बार हस्तक्षेप किया है और कई बार सत्ता भी संभाली है। नवाज शरीफ के दामाद का यह खुलासा बताता है कि सेना का राजनीतिक मामलों में कितना बड़ा दखल हो सकता है। सेना और राजनीतिक दलों के बीच का संबंध हमेशा से ही तनावपूर्ण रहा है और यह खुलासा इस तनाव को और बढ़ा सकता है।
भविष्य की चुनौतियाँ
नवाज शरीफ की वापसी और उनके दामाद के खुलासे के बाद, पाकिस्तान की राजनीति में कई चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। एक तरफ, नवाज शरीफ और उनके समर्थक इस स्थिति का लाभ उठाने की कोशिश करेंगे, वहीं दूसरी तरफ, उनके विरोधी इसे एक राजनीतिक साजिश के रूप में देखेंगे। इसके अलावा, सेना और इमरान खान के बीच के संबंध भी और अधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं।
नवाज शरीफ के दामाद मोहम्मद सफदर का यह खुलासा पाकिस्तान की राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आया है। यह घटना बताती है कि पाकिस्तान की राजनीति में सेना का कितना बड़ा प्रभाव है और किस तरह से राजनीतिक समीकरण बदलते रहते हैं। यह भी स्पष्ट होता है कि सेना और इमरान खान के बीच के संबंध कितने तनावपूर्ण हो सकते हैं। आने वाले समय में इस खुलासे का पाकिस्तान की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।
यह खुलासा पाकिस्तान की राजनीति में एक बड़ा विवाद पैदा कर सकता है और इसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। इसके साथ ही, नवाज शरीफ और उनके परिवार का राजनीतिक भविष्य भी इस खुलासे से प्रभावित हो सकता है। पाकिस्तान की राजनीति में यह एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है और इसके परिणामस्वरूप आने वाले दिनों में कई बदलाव देखे जा सकते हैं।
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