दरभंगा, बिहार में शराब जब्ती: अवैध शराब तस्करी की बढ़ती समस्या और कानून व्यवस्था पर सवाल

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दरभंगा, बिहार में हाल ही में हुई शराब जब्ती की घटना ने राज्य में अवैध शराब तस्करी की बढ़ती समस्या को एक बार फिर उजागर किया है। पुलिस और सीआईडी टीम ने सिलीगुड़ी से कुशेश्वरस्थान आने वाली एक बस से 114 कार्टन शराब जब्त की, जिसमें विदेशी शराब और बीयर की बड़ी मात्रा शामिल थी। इस घटना में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें बस चालक, कंडक्टर, और अन्य संदिग्ध तस्कर शामिल हैं।  यह घटना बिहार के उन कानूनों की विफलता को उजागर करती है जो राज्य में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद भी शराब तस्करी को रोकने में असफल हो रहे हैं। बिहार में शराबबंदी लागू है, लेकिन इस प्रकार की घटनाएं दिखाती हैं कि अवैध शराब का कारोबार अभी भी फल-फूल रहा है।  घटना का मुख्य कारण अवैध शराब की बढ़ती मांग और इसकी तस्करी में शामिल गिरोहों का सक्रिय होना है। इस बस में शराब को आइसक्रीम बनाने के सामान के तौर पर छिपाया गया था, ताकि पुलिस की नजरों से बचा जा सके। पुलिस और सीआईडी की इस कार्रवाई ने तस्करों के इस प्रयास को नाकाम कर दिया, लेकिन यह एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि इस प्रकार की अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए और क्या कदम...

अयोध्या में मस्जिद निर्माण वाली जमीन पर दिल्ली की महिला का दावा: सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी


अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत मस्जिद निर्माण के लिए आवंटित की गई जमीन पर एक नया विवाद सामने आया है। दिल्ली की रहने वाली एक महिला, रानी पंजाबी, ने उस जमीन पर अपना मालिकाना हक होने का दावा किया है और सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती देने की बात कही है।


रानी पंजाबी का दावा

रानी पंजाबी का कहना है कि उनके परिवार को विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आने पर अयोध्या के धन्नीपुर गांव में 28.35 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी। रानी के पिता, ज्ञानचंद पंजाबी, पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र से आए थे और उन्हें विभाजन के बाद भारत में इस जमीन का आवंटन हुआ था। रानी का दावा है कि मस्जिद के लिए आवंटित की गई पांच एकड़ जमीन उनके परिवार की जमीन का ही हिस्सा है।


दस्तावेज़ और प्रमाण

रानी पंजाबी ने कहा कि उनके पास इस जमीन के मालिकाना हक के सभी आवश्यक दस्तावेज़ मौजूद हैं। उनका दावा है कि प्रशासन ने उनके परिवार की जमीन पर कब्जा कर लिया और इसे सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को आवंटित कर दिया। रानी ने यह भी कहा कि वह मस्जिद के निर्माण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वह चाहती हैं कि प्रशासन उनके दस्तावेज़ों के आधार पर उनके साथ न्याय करे और उनकी जमीन की माप करवाए।


सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का जवाब

सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष, जुफर फारूकी, ने कहा कि रानी पंजाबी का दावा पहले ही इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा खारिज किया जा चुका है। उनका कहना है कि मस्जिद निर्माण में कोई अड़चन नहीं है और अक्टूबर 2024 से परियोजना पर काम शुरू हो जाएगा। फारूकी ने कहा कि परियोजना का डिजाइन नए सिरे से तैयार किया जा रहा है और एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया गया है।


सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में 9 नवंबर 2019 को अपने ऐतिहासिक फैसले में विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण और मुसलमानों के लिए अयोध्या में पांच एकड़ जमीन आवंटित करने का आदेश दिया था। इस आदेश के तहत सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को धन्नीपुर गांव में जमीन आवंटित की गई थी।


मस्जिद और अन्य परियोजनाएं

इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट, जिसे मस्जिद निर्माण का जिम्मा सौंपा गया है, ने इस जमीन पर मस्जिद के साथ-साथ एक अस्पताल, सामुदायिक रसोई, पुस्तकालय और शोध संस्थान बनाने की योजना बनाई है। ट्रस्ट का कहना है कि परियोजना में कोई बाधा नहीं है और इसे समय पर पूरा किया जाएगा।


रानी पंजाबी की स्थिति

रानी पंजाबी का कहना है कि उनके पिता के दिल्ली में बसने के बाद से उनकी जमीन पर कब्जा हो गया था। वर्ष 1983 में उनके पिता की तबीयत खराब होने पर उनके इलाज के लिए उनका परिवार दिल्ली में बस गया था। उसके बाद से फैजाबाद स्थित उनकी जमीन पर कब्जा होता चला गया। रानी का कहना है कि उनके पास जमीन के मालिकाना हक के सभी दस्तावेज़ मौजूद हैं और वह सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को चुनौती देंगी।


शरीयत का संदर्भ

इस मामले में इस्लामी कानून (शरीयत) के तहत यह मुद्दा भी उठाया जा रहा है कि इस्लाम में किसी विवादित जमीन पर मस्जिद बनाना जायज नहीं माना जाता है। उलेमा (इस्लामी धर्म गुरुओं) के मुताबिक, मस्जिद के निर्माण के लिए जमीन का विवादित नहीं होना आवश्यक है। रानी पंजाबी का दावा है कि उनकी जमीन विवादित है और इस पर मस्जिद बनाना इस्लामी कानून के खिलाफ है।


मौजूदा स्थिति

इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि उन्होंने रानी पंजाबी से कई बार मुलाकात की है और उनसे कहा है कि अगर उनके पास अपने दावे के समर्थन में पुख्ता सबूत हैं तो उन्हें पेश करना चाहिए। ट्रस्ट का कहना है कि रानी पंजाबी के दावे को पहले ही अदालत द्वारा खारिज किया जा चुका है और मस्जिद निर्माण में कोई बाधा नहीं है।


परियोजना का भविष्य

परियोजना के निर्माण के लिए धन जुटाने और अन्य आवश्यकताओं के पूरा होने में कुछ देरी हुई है, लेकिन ट्रस्ट को उम्मीद है कि अक्टूबर 2024 तक काम शुरू हो जाएगा। मस्जिद के साथ-साथ अन्य सुविधाओं का निर्माण भी जल्द ही शुरू होगा और यह उम्मीद जताई जा रही है कि राम मंदिर के साथ-साथ मस्जिद का निर्माण भी पूरा हो जाएगा।



अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए आवंटित जमीन पर दिल्ली की रानी पंजाबी का दावा एक नया विवाद खड़ा कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की चुनौती के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस जमीन पर मस्जिद का निर्माण संभव होगा या नहीं। हालांकि, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट का कहना है कि इस दावे का मस्जिद निर्माण पर कोई असर नहीं पड़ेगा और परियोजना समय पर पूरी होगी। रानी पंजाबी के दावे और अदालत में इस मामले की सुनवाई के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, मस्जिद निर्माण के लिए सभी तैयारियां की जा रही हैं और उम्मीद है कि यह परियोजना जल्द ही पूरी होगी।

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