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फतेहपुर सीकरी, उत्तर प्रदेश - इतिहास के पन्नों में दबी कई कहानियाँ अक्सर खुदाई के दौरान सामने आती हैं। ऐसा ही एक मामला हाल ही में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी के पास स्थित सांथा गांव में देखने को मिला, जहाँ श्मशान भूमि की खुदाई के दौरान प्राचीन हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ मिलीं। यह मूर्तियाँ सैकड़ों साल पुरानी हैं और इन्हें देखकर इतिहास के जानकार और ग्रामीण हैरान हैं।
खुदाई के दौरान मिली प्राचीन मूर्तियाँ
यह घटना तब सामने आई जब सांथा गांव में श्मशान भूमि की खुदाई की जा रही थी। खुदाई के दौरान ग्रामीणों को कुछ प्राचीन मूर्तियाँ मिलीं। ग्रामीणों ने तत्काल इन मूर्तियों को सुरक्षित स्थान पर रखने और पुरातत्व विभाग को सूचित करने की मांग की। मूर्तियों की प्राचीनता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इनमें से कई मूर्तियाँ क्षतिग्रस्त अवस्था में पाई गई हैं।
अधिवक्ता अजय प्रताप ने इन मूर्तियों को पास के ही एक मंदिर में सुरक्षित रखवा दिया है। उनका कहना है कि ये मूर्तियाँ आठवीं सदी की हो सकती हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) के आगरा सर्किल के पूर्व अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. डीवी शर्मा ने मूर्तियों की तस्वीरें देखकर बताया कि इनमें एक प्रमुख मूर्ति भगवान विष्णु की प्रतीत हो रही है, जो कि करीब 8वीं शताब्दी की है।
सांथा गांव का ऐतिहासिक महत्व
ग्राम सांथा में मिली मूर्तियाँ प्राचीन हिन्दू सभ्यता के दबे होने के प्रमाण हैं। फतेहपुर सीकरी में कामाख्या देवी के एक विशाल मंदिर के अस्तित्व का दावा भी किया गया है, जिसे लेकर अधिवक्ता अजय प्रताप ने कोर्ट में वाद दाखिल किया है। अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने सांथा में स्थित सिकरवारों की कुल देवी मंदिर के पास इन मूर्तियों को देखा था। ग्रामीणों से जानकारी मिली कि श्मशान बनाने के दौरान खुदाई में ये मूर्तियाँ मिली हैं, जो साल भर से ऐसी ही पड़ी हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यह मूर्तियाँ उनकी कुलदेवी की हैं और यह क्षेत्र उनके पूर्वजों का है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) की कोई भी टीम अभी तक इन मूर्तियों को संरक्षित करने नहीं पहुंची है। अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से मांग की है कि मूर्तियों को संरक्षित किया जाए और इस क्षेत्र में उत्खनन कर भारतीय संस्कृति के गौरवशाली इतिहास का पता लगाया जाए।
कुल देवी मंदिर प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष राघवेंद्र सिकरवार और महामंत्री अधिवक्ता नरेश सिकरवार ने बताया कि यह क्षेत्र उनके पूर्वजों का है और यहां पहले कई मंदिर थे, जिन्हें मुस्लिम काल में तोड़ा गया था। इस बात के कई साक्ष्य मौजूद हैं। फतेहपुर सीकरी में कामाख्या देवी मंदिर के वाद की भी जानकारी दी गई है।
सांस्कृतिक धरोहर का महत्व
सांथा गांव में मिली इन मूर्तियों ने एक बार फिर से यह सिद्ध कर दिया है कि भारत की भूमि कितनी प्राचीन और सांस्कृतिक धरोहरों से भरी हुई है। यह मूर्तियाँ भारतीय इतिहास और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इन्हें संरक्षित करना हमारी जिम्मेदारी है।
पुरातत्वविदों का मानना है कि इन मूर्तियों की सही तरीके से जांच और संरक्षण किया जाना चाहिए। इससे न केवल हमारे इतिहास की धरोहर को बचाया जा सकेगा, बल्कि हमें हमारे अतीत के बारे में और अधिक जानकारी मिल सकेगी।
प्राचीन मूर्तियों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
इन प्राचीन मूर्तियों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत बड़ा है। यह मूर्तियाँ केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि भारतीय इतिहास और संस्कृति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यह मूर्तियाँ हमारे पूर्वजों की कला और संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती हैं और इन्हें संरक्षित करना आवश्यक है।
ग्रामीणों की मांग और पुरातत्व विभाग की जिम्मेदारी
ग्रामीणों की मांग है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इन मूर्तियों को संरक्षित करने के लिए तुरंत कदम उठाए। ग्रामीणों का कहना है कि यह मूर्तियाँ उनकी कुलदेवी की हैं और इन्हें सुरक्षित रखना उनकी जिम्मेदारी है। पुरातत्व विभाग को इस दिशा में जल्द से जल्द कार्रवाई करनी चाहिए ताकि इन मूर्तियों को संरक्षित किया जा सके और भारतीय इतिहास की धरोहर को बचाया जा सके।
ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण
भारतीय इतिहास और संस्कृति की धरोहर को संरक्षित करना हमारी जिम्मेदारी है। सांथा गांव में मिली इन प्राचीन मूर्तियों का संरक्षण केवल ग्रामीणों की ही नहीं, बल्कि पूरे देश की जिम्मेदारी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए और इन मूर्तियों को संरक्षित करने के लिए उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
फतेहपुर सीकरी के पास सांथा गांव में मिली प्राचीन मूर्तियाँ भारतीय संस्कृति और इतिहास की अनमोल धरोहर हैं। इन्हें संरक्षित करना और इनके महत्व को समझना हमारी जिम्मेदारी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित किया जा सके और आने वाली पीढ़ियों को इसके बारे में जानकारी मिल सके।
ग्रामीणों की मांग और पुरातत्वविदों की राय को ध्यान में रखते हुए, यह उम्मीद की जा सकती है कि जल्द ही इन मूर्तियों का सही तरीके से संरक्षण किया जाएगा और इस क्षेत्र में और भी महत्वपूर्ण खोजें की जाएंगी। सांथा गांव में मिली इन मूर्तियों ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि भारत की भूमि कितनी प्राचीन और सांस्कृतिक धरोहरों से भरी हुई है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए और इन मूर्तियों को संरक्षित करने के लिए उचित कार्रवाई करनी चाहिए। इससे न केवल हमारे इतिहास की धरोहर को बचाया जा सकेगा, बल्कि हमें हमारे अतीत के बारे में और अधिक जानकारी मिल सकेगी।
पुरातत्व विभाग की भूमिका और आवश्यक कदम
पुरातत्व विभाग को सांथा गांव में मिली इन प्राचीन मूर्तियों का उचित संरक्षण करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
1. मूर्तियों की सुरक्षा: सबसे पहले, इन मूर्तियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर संरक्षित किया जाना चाहिए। इसके लिए पुरातत्व विभाग को तुरंत एक टीम भेजनी चाहिए।
2. मूर्तियों की जांच: मूर्तियों की प्राचीनता और उनकी स्थिति की जांच की जानी चाहिए। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम को नियुक्त किया जाना चाहिए जो मूर्तियों की सही स्थिति और उनकी प्राचीनता का निर्धारण कर सके।
3. उत्खनन कार्य: सांथा गांव में और भी प्राचीन धरोहरों की खोज के लिए उत्खनन कार्य किया जाना चाहिए। इससे हमें हमारे इतिहास के बारे में और अधिक जानकारी मिल सकेगी।
4. संरक्षण कार्य: मूर्तियों का उचित संरक्षण किया जाना चाहिए ताकि इन्हें लंबे समय तक संरक्षित रखा जा सके। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम को नियुक्त किया जाना चाहिए जो मूर्तियों के संरक्षण का कार्य कर सके।
स्थानीय लोगों की भागीदारी
स्थानीय लोगों की भागीदारी भी इस कार्य में महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों को इस कार्य में सहयोग देना चाहिए और पुरातत्व विभाग के साथ मिलकर मूर्तियों के संरक्षण का कार्य करना चाहिए। इससे न केवल मूर्तियों का संरक्षण हो सकेगा, बल्कि स्थानीय लोगों की भी सहभागिता सुनिश्चित हो सकेगी।
मीडिया की भूमिका
मीडिया को भी इस कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। मीडिया के माध्यम से इस मामले को उजागर किया जाना चाहिए ताकि पुरातत्व विभाग और सरकार इस दिशा में आवश्यक कदम उठा सके। मीडिया की सक्रिय भागीदारी से इस मामले को व्यापक रूप से प्रचारित किया जा सकता है और अधिक से अधिक लोगों को इसके बारे में जानकारी मिल सकती है।
भविष्य की दिशा
फतेहपुर सीकरी के पास सांथा गांव में मिली इन प्राचीन मूर्तियों का संरक्षण और अध्ययन हमारे इतिहास की धरोहर को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए और इन मूर्तियों को संरक्षित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। इससे न केवल हमारे इतिहास की धरोहर को बचाया जा सकेगा, बल्कि हमें हमारे अतीत के बारे में और अधिक जानकारी मिल सकेगी।
फतेहपुर सीकरी के पास सांथा गांव में मिली प्राचीन मूर्तियाँ भारतीय संस्कृति और इतिहास की अनमोल धरोहर हैं। इन्हें संरक्षित करना और इनके महत्व को समझना हमारी जिम्मेदारी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित किया जा सके और आने वाली पीढ़ियों को इसके बारे में जानकारी मिल सके। ग्रामीणों की मांग और पुरातत्वविदों की
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