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भारत, एक उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति, ऊर्जा और औद्योगिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़े कदम की ओर बढ़ रहा है। इसके पीछे प्रमुख कारण है जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के सलाल-हैमाना क्षेत्र में लिथियम भंडार की खोज। लिथियम, जिसे "सफेद सोना" भी कहा जाता है, एक अत्यंत महत्वपूर्ण धातु है जिसका उपयोग रिचार्जेबल बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहनों, और अन्य उच्च तकनीकी उत्पादों में होता है। इस खोज ने भारत को वैश्विक क्रिटिकल मिनरल्स की दौड़ में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है।
लिथियम की महत्ता:
लिथियम को आधुनिक युग की ऊर्जा धातु कहा जा सकता है। यह इलेक्ट्रिक वाहनों, मोबाइल फोन, लैपटॉप, और सौर ऊर्जा भंडारण जैसे विभिन्न उपकरणों में उपयोग होता है। लिथियम-आयन बैटरी की उच्च ऊर्जा घनत्व और लंबी आयु के कारण यह ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में क्रांति ला रही है। इसके अलावा, लिथियम का उपयोग चिकित्सा उपकरणों, अंतरिक्ष तकनीक, और अन्य उच्च तकनीकी क्षेत्रों में भी होता है। वर्तमान में, दुनिया भर में लिथियम की मांग तेजी से बढ़ रही है, और इस खोज ने भारत को आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत आधार दिया है।
जम्मू-कश्मीर में लिथियम भंडार की खोज:
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में लिथियम के बड़े भंडार का पता लगाया गया है। इस क्षेत्र में मिले लिथियम भंडार को दुनिया का सातवां सबसे बड़ा लिथियम भंडार माना जा रहा है। इस भंडार की खोज ने भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल कर दिया है, जिनके पास महत्वपूर्ण लिथियम भंडार हैं। इससे पहले, भारत लिथियम के लिए पूरी तरह से अन्य देशों पर निर्भर था, लेकिन अब इस खोज के बाद भारत अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो सकता है।
छत्तीसगढ़ में लिथियम खदान की शुरुआत:
जम्मू-कश्मीर के अलावा, छत्तीसगढ़ में भी लिथियम के भंडार मिले हैं। कोरबा जिले के कठघोरा इलाके में भारत की पहली लिथियम खदान खोलने की तैयारी की जा रही है। इस खदान से लिथियम के उत्खन्न की शुरुआत होगी, जो भारत को लिथियम-आधारित उत्पादों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाएगी। यह खदान छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 200 किलोमीटर दूर स्थित है। इस क्षेत्र में लिथियम की उपलब्धता 10 से 2,000 पार्ट्स प्रति मिलियन (पीपीएम) के बीच पाई गई है।
लिथियम के वैश्विक भंडार:
विश्व स्तर पर, लिथियम के प्रमुख भंडार चिली, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, अमेरिका, बोलिविया, और चीन में पाए जाते हैं। इनमें से चीन लिथियम का सबसे बड़ा उपभोक्ता और उत्पादक देश है। चीन में दुनिया की 77% लिथियम-आयन बैटरी का उत्पादन होता है, जिससे यह इस क्षेत्र में एकाधिकार स्थापित कर चुका है। भारत, जो वर्तमान में अपनी अधिकांश लिथियम जरूरतों के लिए चीन पर निर्भर है, अब अपनी खुद की लिथियम खदानों के साथ इस एकाधिकार को चुनौती दे सकता है।
लिथियम उत्पादन और व्यापार के लाभ:
भारत में लिथियम के उत्पादन से कई महत्वपूर्ण लाभ होंगे। सबसे पहले, यह भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने में मदद करेगा। भारत, जो वर्तमान में एक बिलियन डॉलर से अधिक की लिथियम आयात करता है, अब अपनी लिथियम की 80% जरूरतों को घरेलू उत्पादन से पूरा कर सकता है। इससे देश की विदेशी मुद्रा बचत होगी और आयात पर निर्भरता कम होगी। इसके अलावा, लिथियम इनपुट कॉस्ट कम होने से इलेक्ट्रॉनिक सामान सस्ते हो सकते हैं, जिससे आम जनता को भी लाभ मिलेगा।
चुनौतियाँ और संभावनाएँ:
हालांकि, लिथियम के उत्खन्न और उत्पादन में कई चुनौतियाँ भी हैं। सबसे बड़ी चुनौती है पर्यावरण पर प्रभाव। लिथियम के उत्खन्न से जल संसाधनों पर दबाव पड़ता है, जिससे स्थानीय जलस्रोतों के सूखने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा, लिथियम के उत्खन्न में होने वाले रासायनिक प्रसंस्करण से मिट्टी और जल प्रदूषण का खतरा भी है। इसलिए, इस क्षेत्र में उत्खन्न को पर्यावरणीय दृष्टिकोण से सावधानीपूर्वक योजना बनाकर करना होगा।
भारत की ऊर्जा रणनीति में लिथियम की भूमिका:
भारत सरकार ने 2047 तक देश को एक ऊर्जा आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इस दिशा में, लिथियम के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देना एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए कई नीतियाँ बनाई हैं, जिनमें से एक प्रमुख है FAME (Faster Adoption and Manufacturing of Hybrid and Electric Vehicles) योजना। इस योजना के तहत, सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी प्रदान कर रही है। लिथियम का घरेलू उत्पादन इस योजना को सफल बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की स्थिति:
लिथियम के घरेलू उत्पादन से भारत वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन सकता है। चीन, जो वर्तमान में लिथियम-आयन बैटरी के उत्पादन में प्रमुख है, को अब भारत से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, भारत अन्य देशों को भी लिथियम और लिथियम-आधारित उत्पादों का निर्यात कर सकता है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी। यह कदम भारत को एक वैश्विक ऊर्जा नेतृत्व की दिशा में अग्रसर कर सकता है।
जम्मू-कश्मीर और छत्तीसगढ़ में लिथियम भंडार की खोज और इसके उत्खन्न की तैयारी भारत के लिए एक बड़ा आर्थिक और रणनीतिक अवसर है। यह खोज न केवल देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने में मदद करेगी, बल्कि इसे वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगी। हालांकि, इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करना आवश्यक है। यदि भारत इस दिशा में सफल होता है, तो यह उसकी आर्थिक और औद्योगिक प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
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