दरभंगा, बिहार में शराब जब्ती: अवैध शराब तस्करी की बढ़ती समस्या और कानून व्यवस्था पर सवाल

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दरभंगा, बिहार में हाल ही में हुई शराब जब्ती की घटना ने राज्य में अवैध शराब तस्करी की बढ़ती समस्या को एक बार फिर उजागर किया है। पुलिस और सीआईडी टीम ने सिलीगुड़ी से कुशेश्वरस्थान आने वाली एक बस से 114 कार्टन शराब जब्त की, जिसमें विदेशी शराब और बीयर की बड़ी मात्रा शामिल थी। इस घटना में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें बस चालक, कंडक्टर, और अन्य संदिग्ध तस्कर शामिल हैं।  यह घटना बिहार के उन कानूनों की विफलता को उजागर करती है जो राज्य में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद भी शराब तस्करी को रोकने में असफल हो रहे हैं। बिहार में शराबबंदी लागू है, लेकिन इस प्रकार की घटनाएं दिखाती हैं कि अवैध शराब का कारोबार अभी भी फल-फूल रहा है।  घटना का मुख्य कारण अवैध शराब की बढ़ती मांग और इसकी तस्करी में शामिल गिरोहों का सक्रिय होना है। इस बस में शराब को आइसक्रीम बनाने के सामान के तौर पर छिपाया गया था, ताकि पुलिस की नजरों से बचा जा सके। पुलिस और सीआईडी की इस कार्रवाई ने तस्करों के इस प्रयास को नाकाम कर दिया, लेकिन यह एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि इस प्रकार की अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए और क्या कदम...

बिहार की पहली सड़क सुरंग और वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे: बिहार के विकास का नया अध्याय

 


बिहार में पहली बार एक सड़क सुरंग का निर्माण होने जा रहा है, जो राज्य के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सुरंग वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे पर स्थित होगी और इसकी लंबाई लगभग 5 किलोमीटर होगी। यह सुरंग कैमूर जिले में बनाई जाएगी, जिससे राज्य को एक नया इंफ्रास्ट्रक्चरल आयाम मिलेगा।


परियोजना का महत्व


वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे, जो 690 किलोमीटर लंबा होगा, बिहार के चार जिलों से होकर गुजरेगा। इस परियोजना का उद्देश्य वाराणसी और कोलकाता के बीच यात्रा को सुगम बनाना है, जिससे समय की बचत होगी। वर्तमान में यह यात्रा लगभग 14 घंटे में पूरी होती है, लेकिन एक्सप्रेसवे के बन जाने के बाद यह दूरी मात्र 7 घंटे में पूरी की जा सकेगी। इस एक्सप्रेसवे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कैमूर की यह सुरंग है, जो सोन नदी को पार कर सासाराम से औरंगाबाद में प्रवेश करेगी।


सुरंग निर्माण का विवरण


सुरंग निर्माण का कार्य राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की देखरेख में हो रहा है, और इसे NH319B के नाम से जाना जाएगा। यह सुरंग देश की छठी सबसे लंबी सड़क सुरंग होगी। इसके निर्माण के बाद, यह बिहार के कैमूर जिले में स्थित कैमूर पहाड़ी के नीचे से गुजरेगी। इसके निर्माण में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि इसे स्थायी और सुरक्षित बनाया जा सके।


सुरंग और एक्सप्रेसवे के फायदे


यह सुरंग न केवल बिहार बल्कि पूर्वी भारत के अन्य हिस्सों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे क्षेत्र में व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। खासकर बिहार के गया जिले में बन रहे लॉजिस्टिक्स पार्क को इस सुरंग से सीधा फायदा होगा, जिससे वस्तुओं की ढुलाई में तेजी आएगी। इसके अलावा, बिहार के कैमूर, सासाराम, औरंगाबाद और गया जिलों में इस परियोजना से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।


चुनौतियां और संभावनाएं


हालांकि इस परियोजना के निर्माण में कई चुनौतियां हैं, जैसे कि भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी, लेकिन सरकार और संबंधित एजेंसियों ने इसे प्राथमिकता दी है। यह सुरंग बिहार के विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी और राज्य को नई पहचान दिलाएगी।



बिहार की यह पहली सड़क सुरंग राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर को नया आयाम देने के साथ-साथ क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह परियोजना न केवल यात्रा को सुगम बनाएगी बल्कि राज्य के उद्योगों और व्यापार को भी बढ़ावा देगी। इस सुरंग का निर्माण बिहार के विकास की कहानी में एक नया अध्याय जोड़ रहा है।

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