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ओबीसी के साथ एससी वर्ग को भी मिला लाभ
इस भर्ती प्रक्रिया में अनुसूचित जाति (एससी) के युवाओं को भी लाभ मिला है। शिक्षक भर्ती में एससी वर्ग के लिए 14,000 से अधिक पद आरक्षित थे, जिन पर एससी युवाओं का चयन हुआ। इसके अतिरिक्त, मेरिट के आधार पर अनारक्षित श्रेणी में भी 1,600 से अधिक एससी अभ्यर्थियों का चयन हुआ। वहीं, अनुसूचित जनजाति (एसटी) के खाली पदों को भी एससी अभ्यर्थियों द्वारा भरा गया, जिससे कुल 17,000 से अधिक एससी अभ्यर्थियों का चयन हुआ।
लोक सेवा आयोग में ओबीसी की बढ़ती हिस्सेदारी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानमंडल के मानसून सत्र में लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षा के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि 2017 से अब तक लोक सेवा आयोग के माध्यम से 46,675 भर्तियां हुई हैं, जिनमें 38.41 प्रतिशत ओबीसी अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। यह संख्या सपा शासनकाल (2012-2017) में 26.38 प्रतिशत थी। योगी सरकार ने ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के लिए भी 3.74 प्रतिशत सीटें आरक्षित की हैं, जबकि अनारक्षित पदों पर सामान्य श्रेणी के 36.76 प्रतिशत युवाओं का चयन हुआ है।
आउटसोर्सिंग भर्तियों में भी ओबीसी की प्रमुखता
आउटसोर्सिंग भर्तियों में भी ओबीसी वर्ग को प्रमुखता मिली है। सूचना विभाग में 676 में से 512 आरक्षित वर्ग के आउटसोर्सिंग कर्मचारियों में से 340 ओबीसी वर्ग के हैं, जो कुल संख्या का लगभग 75 प्रतिशत है। यह स्थिति तब है जब आउटसोर्सिंग भर्तियों में आरक्षण का कोई प्रावधान लागू नहीं है।
योगी सरकार के दावे और विपक्ष के आरोप
विधानमंडल के मानसून सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार ने भर्तियों में आरक्षण प्रावधानों का विधिवत पालन किया है। उन्होंने सपा सरकार के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के हितों की संरक्षक होने के दावों को चुनौती दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा शासनकाल में भर्तियों में ओबीसी और एससी वर्ग की हिस्सेदारी कम थी, जबकि वर्तमान सरकार ने इन वर्गों को अधिक लाभान्वित किया है।
शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता
उत्तर प्रदेश में 69,000 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए योगी सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। इस प्रक्रिया में आरक्षण के प्रावधानों का पालन करते हुए ओबीसी और एससी वर्ग के युवाओं को अधिक संख्या में शामिल किया गया है। इस भर्ती प्रक्रिया में मेरिट के आधार पर भी चयन किया गया, जिससे योग्य उम्मीदवारों को मौके मिले हैं।
भर्ती प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी
69,000 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में ओबीसी वर्ग के लिए 18,000 से अधिक पद आरक्षित थे। इसके सापेक्ष 31,000 से अधिक ओबीसी अभ्यर्थियों का चयन हुआ। एससी वर्ग के लिए 14,000 से अधिक पद आरक्षित थे, जिन पर एससी अभ्यर्थियों का चयन हुआ। अनारक्षित श्रेणी में भी 1,600 से अधिक एससी अभ्यर्थियों का चयन हुआ।
लोक सेवा आयोग की भूमिका
लोक सेवा आयोग ने भी भर्ती प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आयोग ने विभिन्न पदों पर 46,675 अभ्यर्थियों का चयन किया, जिनमें से 38.41 प्रतिशत ओबीसी, 3.74 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस, और 36.76 प्रतिशत अनारक्षित श्रेणी के अभ्यर्थी शामिल हैं। यह चयन प्रक्रिया योगी सरकार की पारदर्शिता और आरक्षण नीति के पालन को दर्शाती है।
विपक्ष के आरोप और सरकार का जवाब
विपक्षी दल सपा और अन्य ने योगी सरकार पर ओबीसी और एससी वर्ग के साथ भेदभाव के आरोप लगाए हैं। हालांकि, सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान सरकार ने भर्तियों में आरक्षण नीति का पालन करते हुए ओबीसी और एससी वर्ग को अधिक लाभान्वित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानमंडल में आंकड़े प्रस्तुत कर विपक्ष के आरोपों का खंडन किया है।
आउटसोर्सिंग भर्तियों में आरक्षण का पालन
हालांकि आउटसोर्सिंग भर्तियों में आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है, फिर भी ओबीसी वर्ग के युवाओं की प्रमुखता बनी हुई है। सूचना विभाग में 676 में से 512 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों में से 340 ओबीसी वर्ग के हैं। यह स्थिति योगी सरकार की नीतियों और उनकी पारदर्शिता को दर्शाती है।
योगी सरकार की भर्तियों में आरक्षण नीति का पालन करते हुए ओबीसी और एससी वर्ग को अधिक लाभान्वित किया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 69,000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में ओबीसी वर्ग के 31,000 से अधिक युवाओं का चयन हुआ है। लोक सेवा आयोग के माध्यम से 46,675 भर्तियों में से 38.41 प्रतिशत ओबीसी अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। यह आंकड़े सरकार की पारदर्शिता और आरक्षण नीति के पालन को दर्शाते हैं, जिससे योगी सरकार पर लगे विपक्षी आरोपों का खंडन होता है।
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