दरभंगा, बिहार में शराब जब्ती: अवैध शराब तस्करी की बढ़ती समस्या और कानून व्यवस्था पर सवाल

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दरभंगा, बिहार में हाल ही में हुई शराब जब्ती की घटना ने राज्य में अवैध शराब तस्करी की बढ़ती समस्या को एक बार फिर उजागर किया है। पुलिस और सीआईडी टीम ने सिलीगुड़ी से कुशेश्वरस्थान आने वाली एक बस से 114 कार्टन शराब जब्त की, जिसमें विदेशी शराब और बीयर की बड़ी मात्रा शामिल थी। इस घटना में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें बस चालक, कंडक्टर, और अन्य संदिग्ध तस्कर शामिल हैं।  यह घटना बिहार के उन कानूनों की विफलता को उजागर करती है जो राज्य में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद भी शराब तस्करी को रोकने में असफल हो रहे हैं। बिहार में शराबबंदी लागू है, लेकिन इस प्रकार की घटनाएं दिखाती हैं कि अवैध शराब का कारोबार अभी भी फल-फूल रहा है।  घटना का मुख्य कारण अवैध शराब की बढ़ती मांग और इसकी तस्करी में शामिल गिरोहों का सक्रिय होना है। इस बस में शराब को आइसक्रीम बनाने के सामान के तौर पर छिपाया गया था, ताकि पुलिस की नजरों से बचा जा सके। पुलिस और सीआईडी की इस कार्रवाई ने तस्करों के इस प्रयास को नाकाम कर दिया, लेकिन यह एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि इस प्रकार की अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए और क्या कदम...

इजरायल को हथियारों और गोला-बारूद के निर्यात पर रोक की मांग


इजरायल और हमास के बीच चल रहे संघर्ष के दौरान, भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को एक पत्र भेजा गया है जिसमें इजरायल को हथियारों और गोला-बारूद के निर्यात का लाइसेंस रद्द करने की मांग की गई है। इस पत्र पर 25 प्रमुख नागरिकों के हस्ताक्षर हैं, जिनमें पूर्व न्यायाधीश, राजनयिक, कार्यकर्ता, लेखक और अर्थशास्त्री शामिल हैं। पत्र में कहा गया है कि इजरायल को सैन्य सामग्री की आपूर्ति भारत के संविधान और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का उल्लंघन है।


पत्र का मुख्य बिंदु

पत्र में कहा गया है कि इजरायल को हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति करने वाली भारतीय कंपनियों को निर्यात लाइसेंस जारी किया जा रहा है, जो कि चिंता का विषय है। पत्र में तीन भारतीय कंपनियों - मुनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL), प्रीमियर एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड (PEL) और अडानी-एल्बिट एडवांस्ड सिस्टम्स इंडिया लिमिटेड का उल्लेख किया गया है, जो इजरायल की रक्षा उत्पादन कंपनियों के लिए काम करती हैं।


पत्र में बताया गया है कि अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने स्पष्ट रूप से फैसला सुनाया है कि इजरायल अपने दायित्वों का उल्लंघन कर रहा है। 30 जुलाई को लिखे गए इस पत्र में कहा गया है कि इजरायल को किसी भी सैन्य सामग्री की आपूर्ति अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत भारत के दायित्वों और भारत के संविधान के अनुच्छेद 51 (सी) के साथ अनुच्छेद 21 के जनादेश का उल्लंघन होगा।


नैतिक और कानूनी पहलू

पत्र में उल्लेख किया गया है कि अंतर्राष्ट्रीय कानून के अलावा, ऐसे निर्यात नैतिक रूप से आपत्तिजनक और वास्तव में घृणित हैं। पत्र के हस्ताक्षरकर्ताओं ने रक्षा मंत्री से आग्रह किया है कि भारत को यह सुनिश्चित करने के लिए तुरंत हर संभव प्रयास करना चाहिए कि इजरायल को पहले ही दिए जा चुके हथियारों का इस्तेमाल नरसंहार या अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन में न किया जाए।


इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में अरुंधति रॉय, प्रशांत भूषण, जीन ड्रेज, और अन्य प्रमुख व्यक्ति शामिल हैं। इन लोगों का मानना है कि इजरायल को हथियारों की आपूर्ति भारत की नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों के खिलाफ है।


भारतीय कंपनियों की भूमिका

भारत की कई सरकारी और निजी कंपनियां इजरायली रक्षा उत्पादन कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। ये भारतीय कंपनियां इजरायल की कंपनियों के लिए उनके उत्पादों के विभिन्न हिस्से बनाती हैं। पत्र में तीन भारतीय कंपनियों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जो इजरायल की रक्षा जरूरतों को पूरा करती हैं।


मुनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL) और प्रीमियर एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड (PEL) जैसी कंपनियां इजरायल के लिए विभिन्न प्रकार के गोला-बारूद का उत्पादन करती हैं। इसके अलावा, अडानी-एल्बिट एडवांस्ड सिस्टम्स इंडिया लिमिटेड भी इजरायल के साथ मिलकर काम कर रही है। पत्र में कहा गया है कि इन कंपनियों को निर्यात लाइसेंस जारी करना भारत की अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के खिलाफ है।


मानवाधिकार और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का निर्णय

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने इजरायल के खिलाफ फैसले में कहा है कि इजरायल अपने दायित्वों का उल्लंघन कर रहा है। ICJ ने इजरायल पर यह आरोप लगाया है कि वह अपने सैन्य ऑपरेशनों में मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है। इस फैसले के आधार पर, भारतीय नागरिकों के समूह ने रक्षा मंत्री से आग्रह किया है कि इजरायल को सैन्य सामग्री की आपूर्ति रोक दी जाए।


राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

इस मांग का भारत की राजनीति और समाज पर भी प्रभाव पड़ेगा। अगर रक्षा मंत्री इस मांग को मान लेते हैं, तो यह भारत की अंतर्राष्ट्रीय छवि को मजबूत करेगा और यह संदेश देगा कि भारत मानवाधिकारों और नैतिकता के पक्ष में खड़ा है। इसके अलावा, यह कदम भारत-इजरायल के द्विपक्षीय संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है।



पत्र में की गई मांग एक महत्वपूर्ण नैतिक और कानूनी मुद्दा उठाती है। इजरायल को सैन्य सामग्री की आपूर्ति रोकने की यह मांग अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के फैसले और भारत के संवैधानिक दायित्वों के अनुरूप है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रक्षा मंत्री इस पर क्या कदम उठाते हैं और यह मुद्दा भविष्य में कैसे विकसित होता है। 


इजरायल को हथियार और गोला-बारूद की आपूर्ति पर रोक लगाने की यह मांग भारतीय नागरिकों के नैतिक और कानूनी दृष्टिकोण को दर्शाती है। यह कदम न केवल अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के फैसले का सम्मान करेगा, बल्कि भारत की नैतिकता और अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारियों को भी मजबूत करेगा।

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