दरभंगा, बिहार में शराब जब्ती: अवैध शराब तस्करी की बढ़ती समस्या और कानून व्यवस्था पर सवाल
बिहार के दरभंगा जिले के बहादुरपुर प्रखंड स्थित दिलावरपुर पंचायत के मिल्ली चक गांव में स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। इस विवाद का कारण स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध में उठी ग्रामीणों की आवाज है। ग्रामीणों का कहना है कि स्मार्ट मीटर की कीमत अधिक होती है और इससे बिजली के बिल बहुत बढ़ जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप, स्थानीय बिजली विभाग ने शुक्रवार की शाम को पूरे गांव की बिजली काट दी, जिससे गांव में भारी हंगामा मच गया।
स्मार्ट मीटर की अवधारणा और उद्देश्य
स्मार्ट मीटर एक आधुनिक उपकरण है जिसे बिजली की खपत की सटीक निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है। यह मीटर रियल-टाइम डेटा भेजता है, जिससे बिजली की खपत की सटीक जानकारी मिलती है और बिलिंग में सुधार होता है। स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं के वास्तविक समय की खपत को ट्रैक कर सकती हैं, जिससे गलत बिलिंग की संभावनाएं कम होती हैं। इसके अतिरिक्त, स्मार्ट मीटर बिजली की आपूर्ति की अनियमितताओं को भी पहचान सकते हैं, जिससे तुरंत समाधान किया जा सकता है।
ग्रामीणों का विरोध और इसके कारण
मिल्ली चक गांव के निवासी स्मार्ट मीटर के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर की कीमत ज्यादा होती है और इससे बिजली बिल अत्यधिक बढ़ जाते हैं। इसके अलावा, ग्रामीणों ने स्मार्ट मीटर के जल्दी खराब होने की भी शिकायत की है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगाने के लिए कंपनी के कर्मियों ने गांव में कई बार आकर उनकी अनदेखी की और उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया। इन समस्याओं के कारण ग्रामीणों ने स्मार्ट मीटर लगाने से मना कर दिया।
बिजली विभाग की प्रतिक्रिया और बिजली की कटौती
स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध के बावजूद, बिजली विभाग ने गांव की बिजली काटने का कदम उठाया। यह कदम गांव में तनाव को और बढ़ा दिया। ग्रामीणों ने बिजली विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया, स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सूचित किया और कई बार फोन कॉल्स की, लेकिन बिजली की आपूर्ति बहाल नहीं की गई। इससे रातभर अंधेरे में रहना पड़ा और ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया
बिहार में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया दो चरणों में शुरू की गई है। पहले चरण में शहरी क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाए गए, और अब ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रक्रिया को लागू किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि अगस्त 2025 तक ग्रामीण क्षेत्रों में कुल तीन लाख 20 हजार स्मार्ट मीटर लगाए जाएं। यह प्रक्रिया बिजली की आपूर्ति को सटीक और विश्वसनीय बनाने के लिए है।
विद्युत विभाग का रुख और समस्या का समाधान
विद्युत कार्यपालक अभियंता कुंदन कुमार ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पूरे गांव की बिजली काटने की बात गलत है। उन्होंने बताया कि बिजली की आपूर्ति में गड़बड़ी एक तकनीकी समस्या के कारण हुई थी, जो जल्द ही ठीक कर दी जाएगी। बिजली विभाग का कहना है कि उनका उद्देश्य ग्रामीणों को परेशान करना नहीं था, बल्कि यह एक अस्थायी समस्या थी जो जल्दी ठीक कर दी जाएगी।
ग्रामीणों की स्थिति और भविष्य की योजना
ग्रामीणों ने इस विवाद के समाधान के लिए स्थानीय प्रशासन और बिजली विभाग से बातचीत जारी रखी है। वे स्मार्ट मीटर के खिलाफ अपनी शिकायतें दर्ज करवा रहे हैं और इस मुद्दे का स्थायी समाधान चाहते हैं। उनकी मुख्य मांग है कि बिजली बिल की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और स्मार्ट मीटर के संबंध में ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान किया जाए।
स्मार्ट मीटर के फायदे और ग्रामीणों की आशंकाएं
स्मार्ट मीटर के कई फायदे हैं, जैसे कि बिजली की सटीक निगरानी, गलत बिलिंग की संभावना में कमी और तत्काल समस्या समाधान। हालांकि, ग्रामीणों की आशंकाएं भी हैं जो स्मार्ट मीटर के अधिक लागत और जल्दी खराब होने की शिकायतों से जुड़ी हैं। इन आशंकाओं को दूर करने के लिए बिजली विभाग को ग्रामीणों के साथ संवाद बढ़ाना होगा और उनकी समस्याओं का समाधान करना होगा।
मिल्ली चक गांव में स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर उत्पन्न विवाद ने बिजली की आपूर्ति और ग्रामीणों की जीवनशैली पर प्रभाव डाला है। इस विवाद का समाधान केवल संवाद और समझदारी से ही संभव है। बिजली विभाग को ग्रामीणों की शिकायतों पर ध्यान देना होगा और स्मार्ट मीटर की प्रभावशीलता को समझाना होगा ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें