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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई और पुलिस जांच के बाद, विवादित IAS प्रशिक्षु पूजा मनोहरमा दिलीप खेडकर के दुबई भागने की खबरें सामने आई हैं। UPSC द्वारा उनकी सीट रद्द करने और भविष्य की सभी परीक्षाओं से उन्हें वंचित करने के बाद, यह घटना और भी चर्चित हो गई है।
पूजा खेडकर ने 2022 की सिविल सेवा परीक्षा में फर्जी तरीके से अतिरिक्त प्रयास करके और अपनी पहचान को बदलकर पास किया था। UPSC की जांच में यह सामने आया कि उन्होंने न केवल अपने प्रयासों की संख्या को गलत तरीके से बढ़ाया, बल्कि अपने दस्तावेज़ और नाम भी बदल दिए थे। UPSC ने 18 जुलाई, 2024 को खेडकर को नोटिस जारी किया था, जिसमें उनसे 25 जुलाई तक स्पष्टीकरण देने को कहा गया था। उन्होंने दस्तावेज़ तैयार करने के लिए 4 अगस्त तक का समय मांगा, लेकिन समय सीमा समाप्त होने पर भी उन्होंने जवाब नहीं दिया।
UPSC की कार्रवाई:
31 जुलाई, 2024 को UPSC ने खेडकर की सीट रद्द कर दी और उन्हें भविष्य की सभी परीक्षाओं से वंचित कर दिया। UPSC ने पिछले 15 वर्षों के सभी सफल उम्मीदवारों की जांच की और पाया कि खेडकर अकेली ऐसी उम्मीदवार थीं जिन्होंने नियमों का उल्लंघन किया था। UPSC ने स्पष्ट किया कि दस्तावेज़ों की प्रारंभिक जांच के दौरान खामियां पकड़ में नहीं आईं क्योंकि खेडकर ने न केवल अपना नाम, बल्कि अपने माता-पिता के नाम भी बदल दिए थे।
कानूनी कार्यवाही:
UPSC की कार्रवाई के बाद, दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने खेडकर के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का मामला दर्ज किया। कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिससे उनकी गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई। जज देवेंद्र कुमार जांगला ने कहा कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच की जरूरत है।
दुबई भागने की खबरें:
उच्चतम कानूनी दबाव के बीच, खबरें आईं कि पूजा खेडकर दुबई भाग चुकी हैं। इस घटनाक्रम के बाद, जब वह जांच के लिए पेश नहीं हुईं और उनकी जानकारी नहीं मिल पाई, तो अधिकारी अब अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर रहे हैं ताकि उन्हें भारत वापस लाया जा सके और मुकदमा चलाया जा सके।
प्रतिक्रियाएँ और प्रभाव:
इस घोटाले ने व्यापक नाराजगी पैदा की और सिविल सेवा परीक्षा प्रक्रिया की अखंडता पर सवाल उठाए। UPSC की पिछले उम्मीदवारों की जांच इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाती है। इस घटना ने जनता के विश्वास को हिला दिया है और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए कड़ी जाँच की मांग की जा रही है।
पूजा खेडकर का दुबई भागना एक प्रमुख घोटाले के बीच का नया मोड़ है। जैसे-जैसे अधिकारी उन्हें वापस लाने का प्रयास कर रहे हैं, यह मामला सार्वजनिक सेवाओं की चयन प्रक्रियाओं में कठोरता और पारदर्शिता की आवश्यकता को उजागर करता है।
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